दस्तक़

वो कौन है जो देता है दस्तक़ मुझे
किसको याद है मेरे घर का पता ।१।

करने आया है कोई शिकवा नया
या दिलाने याद कोई पुरानी खता ।२।

क्या हासिल होगा कुरेदें घाव अगर
कुरेदने से पहले ज़रा यह तो बता ।३।

अब किस हक़ से करता है सवाल तू
क्या दूँ ज़वाब जब तू ही है लापता ।४।

नहीं रहता यहाँ पर कोई शख़्स अमित
वो था कोई और जिसे तू था जानता ।५।

बाकी रहता मुझमें

अच्छा होता खुदको न खोया होता तुझमें
कुछ तो मुझसा शायद बाकी रहता मुझमें ।१।

दिल है तो फिर यह धड़कता क्यों नहीं है
क्यों यह नासूर सा रिसता रहता मुझमें ।२।

कब के जल के राख़ हो चुके हैं सपनें
क्या यह लावा सा बहता रहता मुझमें ।३।

मुद्दत हुई कि लब पर आयी नहीं हँसी
कौन यह शैतान सा हँसता रहता मुझमें ।४।

मुझसे कोई मुझको मिलवा दो अमित
न जाने कौन काफ़िर है अब रहता मुझमें ।५।

नहीं है तेरा कुसूर

मेरी तन्हाई में नहीं है तेरा कुसूर
होता नहीं तुझसा बुलंद सब का नसीब ।१।

कर दीं फ़ना तमाम उम्र हमनें
इसी उम्मीद में कि देखें तुम्हें क़रीब ।२।

कैसे करूँ गिला कि ठुकरा दिया मुझे
वो भी तो था दोस्त जो बन गया रक़ीब ।३।

नहीं रहा लब्ज़ों पर अब ऐतबार कोई
कहा था एक रोज़ तूने मुझे हबीब ।४।

खुद को कब का समझा चुका अमित
मत कर फिर से सुलह की तरक़ीब ।५।

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