दे दे मुझको कोई कहानी

पहचान सकूँ मैं ख़ुदको
दे मुझको कोई दाग भले
छोड़ दे मुझमें कोई निशानी
दे दे मुझको कोई कहानी

नहीं किया था वादा तूने
नहीं कोई खाई थीं कसमें
कहाँ हुई किसी की हानि
दे दे मुझको कोई कहानी

चाहत नहीं मुर्रव्वत थी वो
चूमें नहीं मेरे लब तुमनें
चूमी थी मेरी पेशानी
दे दे मुझको कोई कहानी

इश्क़ किया है मैंने तुझसे
तुझपे है मेरा कुछ हक़
समझना था मेरी नादानी
दे दे मुझको कोई कहानी

बिना कहे तुम छोड़ गए हो
होगी उसकी कोई वज़ह
करती हूँ बातें याद पुरानी
दे दे मुझको कोई कहानी

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 63

चाँद अभी भी मद्धम है

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के सूरज मेरे
देकर अपनत्व की गरिमा
करोगे रौशन अंतः मेरा।

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के हवा का झोंका
उड़ा के ज़ुल्फ़ें मेरी
करोगे उजागर रँग मेरा।

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के मन मीत मेरे
चूम कर अधर मेरे
करोगे कुंदन तन मेरा।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 62

The moon is still dark

the moon is still dark
it waits for you to enter
my life like a sun
give me endless glow of your
tender love, care, affection

the moon is still dark
it waits for you to enter
my life like a breeze
drive away the clouds that mark
my brow – insecurities

the moon is still dark
it waits for you to enter
my life like a man
claim what is rightfully yours
part my hair and see full moon

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 62

Blog at WordPress.com.

Up ↑