जलती भी नहीं

क्या अज़ब आलम है कि
आग लगाती हो मगर

खुद उसमें जलती भी नहीं ।१।

क्या गज़ब सी बात है कि
लुट गए हम पूरे मगर

तेरी कोई गलती भी नहीं ।२।

दूर कभी न जाने की
खायी थी कसमें मगर

हमसे अब मिलती भी नहीं ।३।

दुनिया होती कदमों में
पर तुम साथ नहीं अगर

मेरी कुछ चलती भी नहीं ।४।

क्या होगा अंजाम अमित
दवा असर न करती और

कोई दुआ फलती भी नहीं ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 48

3 thoughts on “जलती भी नहीं

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