इंतज़ार किसी का

तस्सवुर किसी का न इंतज़ार किसी का
इस दिल को नहीं अब ऐतबार किसी का

सँजोया करती थी कभी ये भी सपने हसीं
आँखें करती नहीं अब दीदार किसी का

न दवा करे असर, न हो दुआ कुबूल
इतना भी न हो कोई बीमार किसी का

आँख खुली तो खुद को अकेला ही पाया
किसी काम नहीं आया करार किसी का

ढल चुका है दिन, कोई न आया “अमित”
मत देख तू अब रस्ता बेकार किसी का

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