नज़रिए की बात

किसी का दिल टूटा
पीछा किसी का छूटा
नज़रिए की बात है ।१।

मिला है नया मीत तुम्हें
तुम मना रहे हो जश्न
अपनी तो मात है ।२।

थे हम भी कभी अज़ीज़
अब तो देखते भी नहीं
बदले हुए हालात हैं ।३।

ढून्ढ रहा हूँ सुकूँ क्यों
क्योंकर आएगी नींद मुझे
तन्हाई की रात है ।४।

क्यों है मायूस अमित
लुटी नहीं कोई मिल्कियत
सस्ते से ज़ज़्बात हैं ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 98

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