नाइत्तिफ़ाक़ी

रखते हैं वो नाइत्तिफ़ाक़ी मेरे हालत से यूँ
देख अपनी ख़ुमारी समझते हैं शराबी हमको ।१।

सुनकर इज़हार-ए-वफ़ा आती है हँसी उनको
लगती हैं तमाम बातें हमारी किताबी उनको ।२।

न देखे उनको तो नहीं आता है दिल को सुकूं
कौन जाकर समझाए हमारी यह बेताबी उनको ।३।

वो जो देते थे कभी ख़ुदा का दर्ज़ा हमको
हमारे किरदार में दिखती है खराबी उनको ।४।

पाते ही हमने खो दिया पल भर में उन्हें
रास न आयी “अमित” कामयाबी हमको ।५।

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