सबसे जुदा है तू

मुझे क्यों न हो तेरी आरज़ू
कि सबसे जुदा है तू ।१।

नाउम्मीदी के आलम में
मसलसल एक सदा है तू ।२।

होंगें बहुत हसीं दुनिया में
लेकिन खुद अदा है तू ।३।

कर हम पर भी कोई करम
खुद पर ही फ़िदा है तू ।४।

अब इस से ज्यादा क्या कहूँ
सुन ले मेरा खुदा है तू ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 78

दे दे मुझको कोई कहानी

पहचान सकूँ मैं ख़ुदको
दे मुझको कोई दाग भले
छोड़ दे मुझमें कोई निशानी
दे दे मुझको कोई कहानी

नहीं किया था वादा तूने
नहीं कोई खाई थीं कसमें
कहाँ हुई किसी की हानि
दे दे मुझको कोई कहानी

चाहत नहीं मुर्रव्वत थी वो
चूमें नहीं मेरे लब तुमनें
चूमी थी मेरी पेशानी
दे दे मुझको कोई कहानी

इश्क़ किया है मैंने तुझसे
तुझपे है मेरा कुछ हक़
समझना था मेरी नादानी
दे दे मुझको कोई कहानी

बिना कहे तुम छोड़ गए हो
होगी उसकी कोई वज़ह
करती हूँ बातें याद पुरानी
दे दे मुझको कोई कहानी

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 63

चाँद अभी भी मद्धम है

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के सूरज मेरे
देकर अपनत्व की गरिमा
करोगे रौशन अंतः मेरा।

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के हवा का झोंका
उड़ा के ज़ुल्फ़ें मेरी
करोगे उजागर रँग मेरा।

चाँद अभी भी मद्धम है
कब आओगे तुम प्रिय
बन के मन मीत मेरे
चूम कर अधर मेरे
करोगे कुंदन तन मेरा।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 62

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