तेरी ज़ुल्फ़ के पहरे

कह दिया तुमने कि आज़ाद हो तुम
तेरी ज़ुल्फ़ के पहरे जब भाने लगे हैं ।१।

बेदर्द सा चाँद निकला है फ़लक पे
क्या जाने तुझे भूलने में ज़माने लगे हैं ।२।

फ़िर दिल धड़का, फ़िर साँस ली हमने
क्या तेरा फ़साना हम दोहराने लगे हैं ।३।

चुराया दिल मेरा, फिर नींद और चैन
हुए ऐसे शातिर वो नज़रें चुराने लगे हैं ।४।

है वक़्त-ए-रुख़सत, बता दो उन्हें अमित
मना लेना जश्न, हम बस जाने लगे हैं ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 68

Worries

a
dread
fill
s me
chill between
us shows no sign of
lifting – I’ve made efforts to mend
the fences, be more flexible but the frost remains
wish for twist of fate to filter
any further shocks
and salvage
anxious
poor
me

In response to The Sunday Whirl’s – Wordle 379

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