सबसे जुदा है तू

मुझे क्यों न हो तेरी आरज़ू
कि सबसे जुदा है तू ।१।

नाउम्मीदी के आलम में
मसलसल एक सदा है तू ।२।

होंगें बहुत हसीं दुनिया में
लेकिन खुद अदा है तू ।३।

कर हम पर भी कोई करम
खुद पर ही फ़िदा है तू ।४।

अब इस से ज्यादा क्या कहूँ
सुन ले मेरा खुदा है तू ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 78

न टूटे तारा कोई

किस सिम्त देखूँ
सामने है ज़िन्दगी
और तू पीछे कहीं

वो न छोड़े मुझे
कैसी विडम्बना
तू अपनाये नहीं

कशमकश में हूँ
साँसें हैं मेरी या
कहीं गिरवी रखी

देखूँ आसमां तो
दुआ करे दिल मेरा
न टूटे तारा कोई

चुभता हूँ अब भी
आँखों में तेरी अमित
है यह कैसी नमी

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 76

तुझसा नहीं ज़लाल

हाँ दीवाना हूँ मैं
चलती हो तुम जैसे
अपनी नयी हर चाल

समझ लेती हो कैसे
मेरे बिना कहे ही
तमाम अनकहे ख़याल

या फिर बिन बोले ही
आँखों ही आँखों में
पूछती हो सवाल

होंगें बहुत हसीं यहाँ
अमित इस दुनिया में
तुझसा नहीं ज़लाल

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 75

मन का अँधेरा

चाँद सा मुखड़ा मेरा
कहाँ देखा है किसी ने
मेरे मन का अँधेरा ।१।

मेरी धीमी मुस्कान
चाहा ही कहाँ तुमने
समझना मेरा सवेरा ।२।

उलझी हुई लट मेरी
संवारेगा कौन भला
इन उलझनों का डेरा ।३।

रंग रूप का खज़ाना
ढूंढ़ती हैं प्यासी आंखें
मेरी तमस का लुटेरा ।४।

मन एक मंदिर मेरा
कौन करेगा आकर
अमित इसमें बसेरा ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 74

तेरे अफ़साने में

पल भर में न कर हिसाब ऐ दोस्त
एक उम्र लगी है तुझे मनाने में ।१।

तू ही चैन का पल दे सुबह मुझे
रात थक गयी है मुझे सुलाने में ।२।

कर लेने दे अपना दीदार ऐ साकी
आज मय नहीं है मेरे पैमाने में ।३।

डर लगता है ज़माने से मुझको
सर छिपाने दो मुझको मैख़ाने में ।४।

कर फिर कोई झूठा वादा अमित
कर लूँ यक़ीन तेरे अफ़साने में ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 73

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