Icy morn

a
cold
icy
morn
is all
that remains of what
started as hot steamy evening

August Writing Prompts

हिज्र की रात

तुम क्या जानो कैसे बीती
काली वाली हिज्र की रात।

रह रह कर याद आती थी
तुम्हारी कही हुई हर बात।

बहुत गुमान था खुद पर मुझको
तुमने दिखला दी औकात।

मरहम मुझको कौन लगाता
आग लगाती थी बरसात।

दिल को मैंने खूब मनाया
पर ढाक के वही तीन पात।

क्या तुमने की थी दिल्लगी
यहाँ लगे हुए थे जज़्बात।

राहू की यह महा दशा है
या साल शनि के साढ़े सात ?

यूँ ही कटेगी उम्र मेरी अब
या फिर सुधरेंगे हालात ?

Blog at WordPress.com.

Up ↑