इंतज़ार

दिल अभी भी वहीं पड़ा है
नाज़-ओ-अंदाज़ से तुमने
जहाँ किया था उसे तलब
सुनाया था अपना फरमान ।१।

सोचता है पड़ा बेचारा
वो दिन फिर से आएगा
याद तुम्हे जब आएगी
होंगे पूरे कुछ अरमान ।२।

डरता है कुछ कहने से
कहीं सुनकर भी तुमने
अनसुनी की उसकी फ़रयाद
क्या रहेगा उसका मान ।३।

क्या विकल्प है तुम्हीं कहो
अमित उस बेचारे के पास
तुम्हें दिखता है धीरज उसका
नहीं दिखता उसका अपमान ।४।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 57

एक बूँद आँसूं की

मैं एक बूँद आँसूं की
जो कुछ ही पलों में
बस फ़ना हो जाएगी

न रहेगा वुज़ूद मेरा
पर तेरी आँखों में कोई
ख़ामोशी रह जाएगी

देखेंगे लोग तेरी हँसी
पर मेरी ताप-ओ-नमी
कहीं दबी रह जाएगी

होगा नया ग़म कोई
तो नया सैलाब लाएगा
किसे मेरी याद आएगी

मैं एक बूँद आँसूं की
जो दर्द तेरा लिए अमित
बस फ़ना हो जाएगी

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 56

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