आशार तेरे हैं

फ़िर आया ख़याल तेरा, फिर निकले आशार नए
ये ख़याल तेरा है या आशार तेरे हैं

जिस सिम्त देखता हूँ, तू ही नज़र आता है
तू ही बतला क्या रूप हज़ार तेरे हैं

चलो आओ करें इस गुलिस्तां का बॅटवारा
रख लो तुम फूल सभी ख़ार मेरे हैं

हर शख़्स लगता है मुझे चोट खाया हुआ
इस शहर में क्या सब बीमार तेरे हैं

क्या करे कोई तुझसे शिकवा गिला अमित
अपनी सफाई में बहाने तैयार तेरे हैं

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 153

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