बीमारी इश्क़ की

अब किस उम्मीद से मैं आवाज़ दूँ तुझे
मेरी कोई बात तुझ तलक जाती नहीं ।१।

ज़माना हो गया है आए हिचकी मुझे
लगता है याद मेरी अब तुझे आती नहीं ।२।

शायद मिल जाती तू मुझे सपनों में कभी
क्या करूँ कमबख़्त नींद ही आती नहीं ।३।

एक आइना था घर में मुझे चाहने वाला
अब उसे भी यह सूरत मेरी भाती नहीं।४।

काश कोई बतला देता मुझे पहले अमित
इश्क़ है ऐसी बीमारी जो कभी जाती नहीं।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 60

अजनबी सी है

जो मैनें कहा
वो तूने सुना ही नहीं
पर हम में कहा सुनी सी है ।१।

कोई ख़ता
जब मुझसे हुई ही नहीं
फिर क्यों तू अनमनी सी है ।२।

ख्वाब कोई
तूने मुझे दिखाया ही नहीं
क्यों दिल में खलबली सी है ।३।

मत पूछ मुझे
मेरे अरमानों का सिला
जैसे चिंगारी कोई दबी सी है ।४।

मेरी तो खैर
थी न कभी भी तू अमित
पर अब तू अजनबी सी है ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 60

किसका है

मेरी आँखों में जो बसता है
सुन्दर वो मंज़र किसका है ।१।

हर धड़कन में मीठी टीस
उठाता खंजर किसका है ।२।

मेरे घर के धुँधले आईने में
यादों का पिंजर किसका है ।३।

खिज़ा को जो खुद तलब करे
गुलशन वो बंजर किसका है ।४।

बोया था तूने बबूल अमित
पूछता है शज़र यह किसका है ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 58

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