Dear women in my life

dear women in my life,
mother, sister, daughter, wife
you help me in times of strife
mother, sister, daughter, wife
without you, I can’t survive
forget a day, not minutes five
dear women in my life,
mother, sister, daughter, wife

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 125

रात गुज़र जाती है यूँ भी

न वो आएं, न नींद आए
रात गुज़र जाती है यूँ भी

देती है हर इलज़ाम मुझे
हक़ जतलाती है यूँ भी

करे सवाल आँखों आँखों में
मुझसे बतियाती है यूँ भी

“हम आपके हैं ही कौन “
कह बातें मनवाती है यूँ भी

बिखराती है ज़ुल्फ़ चेहरे पे
कभी चाँद छिपाती है यूँ भी

किताबों की दुनिया

नहीं मिलती सभी को उनकी मुहब्बत
हकीक़त नहीं है किताबों की दुनिया

कहा मजनू किसी ने, किसी ने दीवाना
हुआ इश्क़ मिली है ख़िताबों की दुनिया

पूछी उम्र किसी ने, किसी ने दिखाया
मज़हब, पीछे पड़ी है रिवाज़ों की दुनिया

देख कर सिर्फ आँखे, हो जाता था इश्क़
बहुत खूबसूरत थी हिज़ाबों की दुनिया

हर कोई मुझे ही समझाता है “अमित”
समझे सवाल मेरा, ये जवाबों की दुनिया

इन आँखों ने

इन आँखों ने क्या कुसूर किया
क्यों नींद नहीं आती इनको

जब से हुआ है दीदार तेरा
और शह नहीं भाती इनको

पा जाती ये निज़ात अगर
तुम नहीं उलझाती इनको

हैं दिया पर है ज़लाल कहाँ
मयस्सर नहीं बाती इनको

आँसू थे अब सूख चुके हैं
न समझो जज़्बाती इनको

तुम्हें अपना समझते थे

खूब दिया तुमने सिला
तुम्हें अपना समझते थे

आँखों में चुभता है अब
जिसे सपना समझते थे

क्योंकर दिया ये दर्द हमें
गर तड़पना समझते थे

वो था तेरा ही नाम जिसे
तुम जपना समझते थे

बना लिया आदत तूने
हम बचपना समझते थे

ज़ख़्म सिलते नहीं

कोशिशें कर के भी देख लिया
ज़ख़्म सिलते नहीं ।१।

वो जो थे शरीक़-ए-ज़िंदगी
अब तो मिलते नहीं ।२।

रातों को नींद आती नहीं
ख़्वाब छलते नहीं ।३।

अब कहाँ जाएं परवाने कि
चराग़ जलते नहीं ।४।

बेरंग है ज़िन्दगी अमित
खिज़ा में गुल खिलते नहीं ।५।

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