शून्यता

आशा की कोई किरण छूती नहीं
किसी ज़ज़्बात की अनुभूति नहीं ।१।

नहीं अब उम्मीदों का बोझ मगर
शून्यता का भार कम चुनौती नहीं ।२।

गुज़रती थी हर राह तेरी ओर कभी
अब कोई सदा मुझको बुलाती नहीं ।३।

हो जाऊंगा एक रोज़ यूँ ही फ़ना अमित
होता था मैं चिराग, अब बाती नहीं ।४।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 82

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