ऐतबार फ़िर जुड़ता नहीं

दिल में अब प्यार उमड़ता नहीं
टूटा हुआ ऐतबार फ़िर जुड़ता नहीं ।१।

खायी है हर बार शिखस्त ही मैंने
अपने नसीब से अब मैं लड़ता नहीं ।२।

ख़ार से हो जिस गुलशन की जीनत
वो पतझऱ में भी उजड़ता नहीं ।३।

ख़ुद बंद कर चुके हो सब दरवाज़े
क्या सोचते हो कि दरवेश बढ़ता नहीं।४।

भूल चुका मुहब्बत के फ़साने अमित
वो आँखों से पढ़ाते नहीं, मैं पढ़ता नहीं ।५।

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