किसका है

मेरी आँखों में जो बसता है
सुन्दर वो मंज़र किसका है ।१।

हर धड़कन में मीठी टीस
उठाता खंजर किसका है ।२।

मेरे घर के धुँधले आईने में
यादों का पिंजर किसका है ।३।

खिज़ा को जो खुद तलब करे
गुलशन वो बंजर किसका है ।४।

बोया था तूने बबूल अमित
पूछता है शज़र यह किसका है ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 58

इंतज़ार

दिल अभी भी वहीं पड़ा है
नाज़-ओ-अंदाज़ से तुमने
जहाँ किया था उसे तलब
सुनाया था अपना फरमान ।१।

सोचता है पड़ा बेचारा
वो दिन फिर से आएगा
याद तुम्हे जब आएगी
होंगे पूरे कुछ अरमान ।२।

डरता है कुछ कहने से
कहीं सुनकर भी तुमने
अनसुनी की उसकी फ़रयाद
क्या रहेगा उसका मान ।३।

क्या विकल्प है तुम्हीं कहो
अमित उस बेचारे के पास
तुम्हें दिखता है धीरज उसका
नहीं दिखता उसका अपमान ।४।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 57

एक बूँद आँसूं की

मैं एक बूँद आँसूं की
जो कुछ ही पलों में
बस फ़ना हो जाएगी

न रहेगा वुज़ूद मेरा
पर तेरी आँखों में कोई
ख़ामोशी रह जाएगी

देखेंगे लोग तेरी हँसी
पर मेरी ताप-ओ-नमी
कहीं दबी रह जाएगी

होगा नया ग़म कोई
तो नया सैलाब लाएगा
किसे मेरी याद आएगी

मैं एक बूँद आँसूं की
जो दर्द तेरा लिए अमित
बस फ़ना हो जाएगी

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 56

हाशिया हूँ मैं

बहता हुआ दरिया हूँ मैं
खुद प्यासा रहता हूँ मगर
तृप्ति का ज़रिया हूँ मैं

उड़ती हुई चिड़िया हूँ मैं
सारा आसमां है ज़द में मेरे
गुलशन की प्रिया हूँ मैं

जलता हुआ दिया हूँ मैं
अंधकार मुझमें पर औरों को
भानु रवि आदित्य हूँ मैं

अज़ब एक प्रक्रिया हूँ मैं
अमित हैं क्षमताएँ मेरी पर
कहानी नहीं हाशिया हूँ मैं

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 55

भूल चुका हूँ मैं

तुझे भुलाने की कोशिश में
सब कुछ भूल चुका हूँ मैं ।१।

तेरे घर की पेचीदा गलियों में
सब सपने भूल चुका हूँ मैं ।२।

मंज़िल तक पहुंचा ही नहीं
और रस्ता भूल चुका हूँ मैं ।३।

आंसू तो अब सूख चुके हैं
हाँ हँसना भूल चुका हूँ मैं ।४।

था ज़माने में कोई शख़्स अमित
अब उसको भूल चुका हूँ मैं ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 54

man-on-bench

शिकायत

हर एक सितम याद आता है तेरा
पर तुझसे कोई शिकायत तो नहीं

इश्क़ करो तो इश्क़ मिलेगा
अब ऐसी कोई रिवायत तो नहीं

तेरा न मिल पाना मुझको
फरिश्तों की सियासत तो नहीं

फिर से हँसके मिलना मुझसे
झूठी कोई इनायत तो नहीं

ले और ज़ख्म सीने पे अमित
उसमें कोई रियायत तो नहीं

सपनों के टुकड़े

टूटे सपनों के कुछ टुकड़े
हैं आँखों में चुभते अब भी ।१।

किस्मत से तो लड़ भी लेता
रूठा है मुझसे रब भी ।२।

कितने दिन का हिज़्र है यारों
गिनने बैठूं गर शब् भी ।३।

याद मेरी भी आती होगी
खुद से लड़ती हो जब भी ।४।

ले अपने सर इल्ज़ाम अमित
क्या भूला है तू अदब भी ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 53

अक्स तेरा

एक नज़र का असर है बाकी
थोड़ी शोखी कुछ बेबाकी

अक्स तेरा क्यों ठहर गया है
वक़्त गुज़र गया हालाँकि

मेरी पलकों में अब भी है
पहली मुलाकात की झांकी

तकता हूँ मैं खाली प्याला
संगदिल निकला मेरा साकी

क्यों है जुदा दुनिया से अमित
क्यों न सीखी कुछ चालाकी

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 53

अब

अभी अभी तो दिल टूटा है
अब रिसते हैं घाव मेरे पर

कब तक टिकेगा यह अब ।१।

हो जाएगी चोट पुरानी
घाव छोड़ जायेंगे निशानी

कौन सँभालेगा मुझको तब।२।

क्या तब भी कोई टीस उठेगी
क्या होगा फिर घाव हरा

जिक्र तेरा कोई करेगा जब।३।

पर आह नहीं निकलेगी कोई
नहीं होगी रुसवाई तेरी

सिल लूँगा मैं अपने लब ।४।

समेट लूँगा इन पलों को
बसा लूँगा अपनी यादों में

अमित कर दूँगा यह अब ।५ ।

In response to: Reena’s Exploration Challenge #Week 52

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