हँसने की बात

टूटा है दिल कोई खिलौना नहीं
ये हँसने की बात नहीं है ।१।

फिर से कर लूँ ऐतबार तेरा
ऐसे तो हालात नहीं हैं ।२।

डरता हूँ कुछ भी कहने से
महफूज़ मेरे जज़बात नहीं हैं ।३।

जो दे मुझे चैन-ओ-सुकून
क्या ऐसी कोई रात नहीं है ।४।

दे दस्तक ख़ुशी तो सोचे अमित
कहीं ये कोई घात नहीं है ।५।

बन कर जुगनू

जब रात होती है सबसे स्याह
होती नहीं आशा की किरण
बन कर जुगनू आती हो तुम

जब जीवन लगने लगे वीरान
अर्थहीन, नीरस और रंगहीन
बन कर ख़ुशबू आती हो तुम

दिन भर की आपाधापी में
मिलते हैं कितने ही आघात
बन कर चन्दन आती हो तुम

नहीं रहे जब कोई पूर्वाग्रह
हो चुका हूँ सपनों से आज़ाद
बन कर बंधन आती हो तुम

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 110

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