कमाल ही तो है

अब तलक ज़िंदा हूँ
तुमपर जां लुटाकर
कमाल ही तो है ।१।

मायूस क्यों है चाँद
सुन के तारीफ तेरी
मिसाल ही तो है ।२।

क्यों खफ़ा हो मुझसे
कुछ कहा तो नहीं
ख़याल ही तो है ।३।

क्योंकर नहीं कहा
खामोश क्यों रहा
मलाल ही तो है ।४।

है भला यह दुनिया
मेरे किस काम की
बवाल ही तो है ।५।

कैसी आस अमित
कैसा है यह मोह
खाल ही तो है ।६।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 88

हवाई किले

आप यूँ ही हमें टहलाते रहें
हम हवाई किले बनाते रहें ।१।

हम दास्तान-ए-इश्क़ सुनाते रहें
आप नादानी पे मुस्कुराते रहें ।२।

आप बेरुख़ी से पेश आते रहें
हम शमा-ए-उम्मीद जलाते रहें ।३।

हाँ जब भी ज़रुरत पड़े हमारी
आप हमको दोस्त बताते रहें ।४।

न कम हो दीवानगी अमित
आप यूँ ही हमें लुभाते रहें।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 87

यादों के गलियारों में

फिर गुज़रा है वो यादों के गलियारों में
कभी गुज़रीं थीं शामें जिसकी बाँहों में

याद है क्या तुम्हें वो भी एक ज़माना था
बिछाते थे आंखें जब तुम हमारी राहों में

अपना न सही, कर इतना एहसान मगर
खो जाने दे मुझे सपनो की पनाहों में

नहीं मिलती है सभी को चाहत अपनी
कुछ उम्र गुज़ार देते हैं अपनी चाहों में

यूँ ही बेलग़ाम लिखता जा रहा हूँ अमित
सोचता हूँ कुछ तो असर होगा आहों में

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 87

तुम्हारे इंतज़ार में

रख दिया है दिल चाकू की धार पे
रिसते हैं ये घाव तुम्हारे इंतज़ार में ।१।

यूँ ही महफ़िल से उठ आया हूँ मैं
शायद हाँ छिपी थी तेरे इंकार में ।२।

और कहीं जाके रुकती नहीं नज़र
उलझ गया है मन तुम्हारे शृंगार में ।३।

उसके घर में देर है अंधेर नहीं हैं
हमने रातें गुज़ार दीं इसी ऐतबार में।४।

वो अब नज़रें चुराने लगा अमित
क्या रखा है ऐसे वस्ल-ए-यार में ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 86

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